Sangharsho Me Bita Jeevan

By Sanjeev Singhai.

जीवन का इतिहास यही है

जीवन की अनबूझ राहों में, चलते-चलते यह बनजारा,
गाता जाये गीत विरह के, जीवन का इतिहास यही है.

यौवन की ऑंखों से देखे, वे सारे स्‍वप्निल सपने थे,
जिन-जिन से नाता जोडा था, वे भी तो सारे अपने थे.

सबके सब हरजाई निकले, जीवन का परिहास यही है,

पीडाओं की अमर कहानी, कोई विरही-मन लिख जाये,
और व्‍यथा के सागर डूबा, कोई व्‍याकुल-तन दिख जाये.

पीता है नित विष का प्‍याला, जीवन का संत्रास यही है.

संघर्षो में बीता जीवन, कभी रात भर सो न पाया,
जिसे कोख में पाला हमने, लगता है अब वही पराया.

तोडो रिश्‍तों की जंजीरें, जीवन का सन्‍यास यही है.

देखो सागर की ये लहरें, सदा कूल से मिलने जाती,
दीप-शिखा को देखो प्रतिदिन, अंधकार से मिलकर आती.

तुम प्रियतम से मिल सकते हो, जीवन का विश्‍वास यही है.

अपने मंदिर की देहरी पर, आशाओं के दीप जलाओ,
जीवन से जो हार चुके हैं, उन्‍हें विजय का घूंट पिलाओ.

परमारथ तन अर्पित कर दो, जीवन का आकाश यही है.

प्रथम रश्मि देखो सूरज की, जीवन में उल्‍लास जगाती,
और चंद्र की चंचल किरणें, सबके तन-मन को हरषाती.

पल-पल में अमृत रस भर दो, जीवन का मधुमास यही है.

कवि परिचय
नाम: डॉ. नथमल झँवर
संपर्क: झँवर निवास,
मेन रोड, सिमगा जिला रायपुर (छ.ग.) 493101


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